बस्तियों को गैर-कानूनी तरीके से हटाने के प्रयासों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
प्रमुख विपक्षी दल के नेता और जन संगठनों के प्रतिनिधि जिलाधिकारी देहरादून के कार्यालय पर ज्ञापन सौंपा।

बस्तियों को गैर-कानूनी तरीके से हटाने के प्रयासों पर तत्काल रोक लगाई जाए।
उत्तराखंड (देहरादून) वीरवार, 10 सितम्बर 2026
आज प्रमुख विपक्षी दल के नेता और जन संगठनों के प्रतिनिधि जिलाधिकारी देहरादून के कार्यालय पर ज्ञापन सौंपा कर आवाज़ उठाई गई,कि दस साल बीतने के बाद कांग्रेस सरकार के समय पारित हुआ 2016 के बस्ती अधिनियम पर अमल न कर, प्रशासन प्रस्तावित एलिवेटेड रोड या कांठ बांग्ला बस्ती का ज़बरन विस्थापन के नाम पर बार बार देहरादून की मज़दूर बस्तियों के क़ानूनी अधिकारों पर हमला कर रहा है। कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और चेतना आंदोलन एवं सर्वोदय मंडल के प्रतिनिधि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एवं समाजवादी पार्टी के समर्थन के साथ प्रशासन से सवाल उठाया कि 2016 के अधिनियम के अनुसार जिलाधिकारी के अध्यक्षता में देहरादून में मलिन बस्ती समिति बननी चाहिए थी लेकिन उसपर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है। उल्टा कांठ बांग्ला बस्ती को ज़बरन विस्थापित कराने का प्रयास जारी है और प्रस्तावित एलिवेटेड रोड के बहाने हज़ारों परिवार को बेघर करने का योजना बन रहा है। ज्ञापन द्वारा प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि कांठ बांग्ला बस्ती का विस्थापन कराने का प्रयास पर रोक लगाया जाये, प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को रद्द कराया जाये, और 2016 के अधिनियम पर युद्धस्तर अमल हो।
ज्ञापन उपजिलाधिकारी सदर को सौंपवाया गया था। सृष्टमंडल में कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय शर्मा; प्रदेश कांग्रेस समिति के महामंत्री वीरेंद पोखरियाल; कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ट के कार्यकारी अध्यक्ष प्रीतम सिंह आर्य; कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रवीण त्यागी, देवेंद्र पाल सिंह, नितिन रावत, संजय थापा, सुमित राज थापा, प्रभात डंडरियाल, मान सिंह, विनोद शर्मा, ऋषि पाल सिंह; सर्वोदय मंडल के हरबीर सिंह कुशवाहा; और चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, मोहम्मद इरफान, कोहसीन, राम सिंह इत्यादि शामिल रहे। कार्यक्रम दून समग्र विकास अभियान द्वारा आयोजित था।




