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Tuesday, November 29, 2022
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14576 फीट की ऊंचाई पर सात दिन की यादगार गश्त, पहली बार शामिल हुई तीन महिला वनकर्मी

आजादी से पहले और बाद में भारत को एक देश तथा समाज के रूप में आगे ले जाने में महिलाओं का अतुलनीय योगदान रहा है । महिलाओं ने सभी क्षेत्रों चाहे वो सांस्कृतिक हो, या राजनैतिक हो, या वैज्ञानिक हो, या कला से जुड़ा हो हर क्षेत्र में बढ़ चढ़ कर अपना योगदान दिया है । आज हम आपको वन विभाग की महिला कर्मीयों के बारे में बताएंगे जो कंधे से कंधा मिलाकर समुद्रतल से 14576 फीट की ऊंचाई पर नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के जंगल व वन्य जीवों की सुरक्षा में लगी हुई है। आइये जानते है इसके बारे में।

उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति ।

उत्तराखंड एक पहाड़ी राज्य होने के नाते पर्यटकों की पहली पसंद रहा है लेकिन यहां की भौगोलिक परिस्थितियांं जीवन को मुश्किल बनाती है । कई दुर्गम क्षेत्रों तक सड़क, पानी और बिजली जैसी सुविधाओं की पहुंची नहीं है, लेकिन ऐसे क्षेत्रों में भी महिलाएं अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाती हैं. गांवों में खेती से लेकर तमाम दूसरे कामों के लिए शारीरिक परिश्रम की जरूरत होती है और महिलाएं हर काम में बढ़ चढ़कर अपनी भागीदारी निभाती हैं ।

नंदादेवी के जंगलों में महिलाओं का योगदान ।

देश की दूसरी सबसे ऊंची और उत्तराखंड की सबसे ऊंची चोटी नंदादेवी के बायोस्फियर क्षेत्र में वन और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए पहली बार महिला जांबाजों को चुना गया है ।पहली बार दो महिला वन दरोगा और एक महिला वन आरक्षी गश्त में शामिल हुई हैं ।अब तक यहां पुरुष की तैनाती होती थी । पर इस बार महिला आरक्षी ने यह जिम्मा उठाया है।

12 सदस्यों में 3 महिलाएं।

महिला वन दरोगा व वन आरक्षी को लंबी दूरी की गश्त के लिए तैयार किया गया है। बीते एक जून को वन विभाग का एक दल लाता खर्क, भेंटा, धरसी और सैनी खर्क गया था । टीम में मौजूद 12 सदस्यों में पहली बार तीन महिलाएं भी शामिल हुईं, जिनमें वन दरोगा ममता कनवासी, दुर्गा सती और वन आरक्षी रोशनी शामिल थीं । टीम को गश्त के लिए रवाना करते हुए वन क्षेत्रधिकारी चेतना कांडपाल ने महिला कर्मियों को पर्वतारोहण के जोखिम से अवगत कराते हुए दिक्कत होने पर वापस लौटने की भी सलाह दी थी । पर पहली बार शामिल हुई तीनों महिला कर्मियों ने अपने बुलंद हौसले के साथ यह कार्य पूरा किया ।

7 दिनों का सफर रहा ।

वन दरोगा ममता कनवासी, दुर्गा सती और वन आरक्षी रोशनी का कहना था कि उनका यह सफर 7 दिनों का रहा। जब ये तीनों गश्त पर गईं तो सात दिन ऐसे कट गए, जैसे वह सभी किसी साधारण राह से गुजर रहे हैं। धराशी पास में नंदा देवी पर्वत की सहायक चोटियों पर बर्फ की ढाल से गुजरते हुए इन्होंने हंसते-हंसते मंजिल तक पहुँच गई ।

लक्ष्य को पूरा करने का जुनून।

बिना रास्ते के दुर्गम क्षेत्र में पहाड़ियों पर चढ़ना व ढाल से उतरना इनलोगों के लिए एक नया अनुभव था। लेकिन, वन्य जीवों की सुरक्षा को ली गई शपथ पूरा करते हुए यह सब उन्हें सामान्य लगा। यह इलाका बेहद दुर्गम था, लेकिन तीनों ने इस पर खतरों के साथ आगे बढ़ने का हौसला उन तमाम खतरों को पीछे छोड़ता गया ।

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