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Wednesday, June 29, 2022
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पर्यावरण के लिए सार्थक बन रहा बीज बम, पढ़‍िए पूरी खबर

हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान द्वारा इन दिनों वृक्षारोपण को बढ़ाने के लिए बीज बम का प्रयोग किया जा रहा है । मानसून सीजन में इस बम को सिर्फ फेंकना होता है। यह बम मिट्टी, पानी और खाद को मिलाकर गोले के रूप में बनाया जाता है। हिमालय पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान द्वारा यह अभियान जोड़ो से चल रहा है । जुलाई तक चलने वाले इस अभियान का नाम बीज बम सप्ताह रखा गया है।
इस बार ऑन लाइन माध्यम से बीज बम अभियान सप्ताह की शुरुआत की गई है। जिसमे देश भर के 12 राज्यों के 95 प्रतिनिधियों ने भाग लिया है।

गांव-गांव में अभियान जोरो पर।

इस अभियान में गांव के सभी लोग भाग ले रहे है। प्रकृति की रक्षा के लिए शुरू किया गया यह अभियान बहुत हद तक कारगर साबित हो रहा है। हिमालयन पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान के अध्यक्ष एवं बीज बम अभियान को शुरू करने वाले द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा है कि यह कोई नई खोज नहीं है। जापान और मिश्र जैसे देशों में यह तकनीकी सीड बॉल के नाम से सदियों पहले से परंपरागत रूप से चलती रही है। द्वारिका सेमवाल द्वारा इस अभियान की शुरुआत सर्वप्रथम उत्तरकाशी जिले के कमद से हुई थी। उनका पहला ही प्रयास सफल रहा। यहां कद्दू आदि बेल वाली सब्जियों के बीजों का इस्तेमाल किया गया था। कुछ समय बाद बेलें उगी और खूब फैली। इस तरह इस अभियान को अब देश के कोने-कोने में फैलाने का लक्ष्य है।

ऐसे बनता है बीज बम।

बीज बम बनाना काफी आसान होता है । इसके लिए खेत की मिट्टी की आवश्यकता होती है । खेत की मिट्टी, पानी और खाद मिलाकर गोले तैयार किये जाते हैं । इन गोलों में बीज डाल दिए जाते हैं । यह दो तरीके से काम करता है या तो उसको फेंका जाता है या फिर जहां वृक्षारोपण करना है वहां इसको रख दिया जाता है । मानसून आने के पश्चात जब इस में नमी होती है तो उससे बीजों का अंकुरण होने लगता है। अंकुरण होने के बाद यह पौधो में तब्दील हो जाता है। इस तरह एक बीज बम से पौधों को उगाया जाता है। यह तरीका काफी हद तक सफल साबित हुआ है।

प्रकृति के लिए काफी लाभदायक।

बीज बम प्रकृति के लिए बहुत लाभदायक है । यह कम खर्च में प्रकृति को बचाए रखने का एक लाजबाब तरीका है। बरसात के मौसम में इसे तैयार कर आप जंगलों में फेंक सकते हैं। यह अपने आप उग जाएगा । इससे निकले पौधों में कीड़े लगने का भी संभावना कम रहता है । आज के बदलते दौर में जहाँ हम प्रकृति के लिए नही सोचते वही हम फलों, सब्जियों के उपयोग के बाद इसके बीज का भंडारण करके आसानी से इसे बनाया जा सकता है। हमसबों का यह कर्तव्य बनता है कि हमारे आने वाली पीढ़ियों के लिए हम प्रकृति को बचाए रखें । यह तरीका अपनाकर हम उन्हें एक स्वच्छ वातावरण प्रदान कर सकते हैं।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।
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