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Wednesday, June 29, 2022
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भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में पांचवें स्थान पर आता है केदारनाथ, जिसकी बनावट और इतिहास दोनों है खास

उत्तराखंड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंग में शामिल होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है। यहां की प्रतिकूल जलवायु के कारण यह मंदिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्‍य ही दर्शन के लिए खुलता है।

भव्य है केदारनाथ मंदिर।

केदारनाथ मंदिर 6 फीट ऊंचे चौकोर चबूतरे पर बनाया गया है। इसके बाहरी प्रांगण में नन्दी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं। इसकी दीवारें करीब 12 फुट मोटी हैं और यह मजबूत पत्थरों से बनाया गया है। यह बात आश्चर्य में डाल देती है कि इतने भारी पत्थरों को इतनी ऊंचाई पर लाकर किस तरह मंदिर का निर्माण किया गया होगा। बाबा केदार का ये धाम कात्युहरी शैली में बना है। वहीं इस मंदिर की छत लकड़ी की बनी हुई है और इसके शिखर पर सोने का कलश रखा हुआ है।वहीं इस मंदिर को तीन भागों में बांटा गया है। केदारनाथ धाम को लेकर कई तरह की कथाएं प्रचलित हैं। माना जाता है कि इसी स्‍थान पर पांडवों ने भी भगवान शिव के एक मंदिर का निर्माण करवाया था।

इन महीनों में खुलता है मंदिर।

केदारानाथ मंदिर की खास बात है कि यह मंदिर सिर्फ अप्रैल से नवंबर महीने के बीच ही दर्शन के लिए खुलता है और सालभर लोग केदारानाथ मंदिर में आने के लिए इंतजार करते हैं। यहां की प्रतिकूल वायु के कारण सर्दी के दिनों में केदारघाटी बर्फ से पूरी तरह ढंक जाती है। खास बात यह है कि इसके बाद इसके खुलने और बंद होने का मुहूर्त भी निकाला जाता है, लेकिन फिर भी ये सामान्यतौर पर नवंबर महीने की 15 तारीख से पहले बंद हो जाता है और 6 महीने बाद अप्रैल में फिर से खुलता है।

मंदिर खुलने और बंद होने का बना है समय।

केदारनाथ के मंदिर के द्वार दर्शनार्थियों के लिए सुबह 6 बजे खोल दिए जाते हैं। जिसके लिए रात से ही लंबी लाइन लगना शुरू हो जाती है। दोपहर तीन से पांच बजे तक विशेष पूजा की जाती है, जिसके बाद मंदिर बंद हो जाता है। पांच बजे फिर मंदिर दर्शन के लिए खोल दिया जाता है। इसके थोड़ी देर बाद भगवान शिव का श्रृंगार होता है, जिस दौरान कपाट थोड़ी देर के लिए बंद कर दिए जाते हैं। फिर 7:30 से 8:30 तक आरती होती है।

केदारनाथ ट्रेन से जाने का रास्ता।

केदारानाथ आप ट्रेन से जा सकते हैं। ऋषिकेश केदारनाथ के सबसे पास रेलवे स्टेशन है जिसके बीच की दूरी 216 किमी है। ऋषिकेश से गौरीकुंड पहुंचने के लिए आप टैक्सी या बस की सर्विस ले सकते हैं। सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच की दूरी मात्र 5 किमी है। यहां सड़क खत्म हो जाती है। 2016 में केदारनाथ तक जाने के लिए दो ट्रैक और तैयार किए हैं। जिसमें से पहला चौमासी से होते हुए खाम, फिर रामबाड़ा और फिर केदारनाथ पहुंचने का है। इस रूट की कुल दूरी18 किमी है।

सड़क मार्ग के द्वारा केदारनाथ जाना।

अगर आप दिल्ली से केदारनाथ सड़क मार्ग द्वारा जाना चाहते हैं तो आप ऋषिकेश, हरिद्वार या देहरादून के रास्ते जा सकते हैं। ऋषिकेश, हरिद्वार या देहरादून पहुंचने के बाद आप केदारनाथ के लिए अपना साधन बुक कर सकते हैं। बस से आप दिल्ली से हरिद्वार 8-9 घंटे मई पहुंच सकते हैं और दिल्ली से आपको ऋषिकेश और हरिद्वार के लिए हर आधे घंटे में सीधे बस सर्विस उपलब्ध होती है।

हवाई मार्ग द्वारा केदारनाथ की यात्रा।

केदारनाथ हवाई जहाज से भी आसानी से पहुंचा जा सकता है। देहरादून कैदारनाथ से 239 कि.मी दूर है। देहरादून में जॉली ग्रांट एयरपोर्ट जॉली ग्रांट एयरपोर्ट केदारनाथ के पास पड़ता है। केदारनाथ की यात्रा सही मायने में हरिद्वार या ऋषिकेश से शुरु होती है। हरिद्वार देश के सभी बड़े और प्रमुख शहरो से रेल द्वारा जुड़ा हुआ है। हरिद्वार तक आप ट्रेन से आ सकते है। यहां से आगे जाने के लिए आप
चाहे तो टैक्सी बुक कर सकते हैं या बस से भी जा सकते हैं।

Shubham Jha
Shubham वर्तमान में पटना विश्वविद्यालय (Patna University) में स्नात्तकोत्तर के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ शुभम अपनी लेखनी के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। इसके अलावे शुभम कॉलेज के गैर-शैक्षणिक क्रियाकलापों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
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1 COMMENT

  1. Gandoo Shiva was a Madarchod – as per Hindoos !

    “The Brahmins will not sacrifice to you along with the other gods, for Siva has defiled the path followed by good men; he is impure, an abolisher of rites and demolisher of barriers,[who gives] the word of the Vedas to a Sudra. He wanders like a madman, naked, laughing, the lord of ghosts, evil-hearted. Let Siva, the lowest of the gods, obtain no share with Indra and Visnu at the sacrifice; let all the followers of Siva be heretics, opponents of the true scriptures, following the heresy whose god is the king of ghosts.” – Brahma Purana 2:13:70-73; Garuda Purana 6:19; Bhagavata Purana 4:2:10-32.

    Wait – there is more !

    भवव्रतधरा ये च ये च तान् समनुव्रताः

    पाखंडिनस्ते भवन्तु सच्छास्त्रपरिपन्थि

    मुमुक्षवो घोररूपान् हित्वा भूतपतीनथ ,

    नारायणकलाः शान्ताः भजन्तीत्यनसूयवः

    One who takes a vow to satisfy Shiva or who follows such principles will “certainly become an atheist and be diverted from transcendental scriptural injunctions”.
    Those who vow to worship Shiva are “so foolish that they imitate him by keeping long hair on their heads”
    When initiated into worship of Lord Śiva, they “prefer to live on wine, flesh and other such things.” [Bhagvatapuran 4/2/28-29]

    तस्माद् विष्णोः प्रसादो वै सेवितव्यो द्विजन्मना,

    इतरेषां देवानां निमल्यिं गर्हितं भवेत् .

    सकृदेव हि योsश्नाति ब्राह्मणो ज्ञानदुर्बलः

    निर्मल्यिं शंकरा दीनां स चांडालो भवेद ध्रुवं

    Dwijas (Brahmin, Khatriya, Vaishya) should only eat the Prasad offered to Vishnu, not of any other deity. If “any foolish Brahmin, even once, will consume the prasad of Shiva”, it is “certain that he will be born as a Chandal (outcaste)”.dindooohindoo

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