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Tuesday, November 29, 2022
HomeInspirationईंट-भट्टे पर मजदूरी करने से लेकर इनोवेटर बनने तक की प्रेरक कहानी

ईंट-भट्टे पर मजदूरी करने से लेकर इनोवेटर बनने तक की प्रेरक कहानी

समय आता है और हमेशा की तरह चला जाता है पर कभी भी रुकता नहीं है। समय सभी के लिए निःशुल्क होता है, लेकिन कोई भी इसे कभी भी न तो बेच सकता है, न ही खरीद सकता है। यह अबंधनीय है, अर्थात् कोई भी इसकी सीमा निर्धारित नहीं कर सकता है। समय को इस संसार में सबसे ताकतवर वस्तु कहा जाता है, जो किसी को भी नष्ट या सुधार सकता है। समय के अनुसार अपने परिश्रम के बदौलत कई लोगों को अपना मुकाम हासिल हुआ है। बस उन लोगों ने समय के उपयोगिता को समझा है। आज हम आपको एक ऐसे ही इंसान लछमन डुंडी के बारे में बताएंगे जिन्होंने समय के महत्व को समझा और सफल हुए। उन्होंने अपने बुरे वक्त को भी समय के साथ पीछे छोड़ दिया। आइये जानते है उनके बारे में।

लछमन डुंडी का परिचय।

Lachhaman Dundi working on his innovations

लछमन डुंडी ओडिशा के नुआपड़ा जिला में कोटमाल गाँव के रहनेवाले है। वह बेहद ही साधारण परिवार से हैं ।लछमन वर्तमान में फिजिक्स विषय से बीएससी कर रहे हैं। लछमन का लगाव हमेशा से इलेक्ट्रॉनिक चीजों में रहा है। लछमन अभी अपने इनोवेशन और स्टार्टअप पर भी काम कर रहे हैं। ओडिशा सरकार के सहयोग से, लछमन ने अपनी एक कंपनी entrepreneur industries की शुरुआत की है। उन्होंने इसे रजिस्टर भी कराया है, ताकि अपने इनोवेशन को लोगों तक पहुंचा सकें। लछमन ने अपने जीवन में बहुत संघर्ष किया है।

माता-पिता के साथ ईंट भट्ठों पर काम किया ।

लछमन का जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। गरीबी के कारण उनके माता-पिता दिहाड़ी-मजदूरी करते हैं। लछमन के माता-पिता के पास थोड़ी सी जमीन है, जिस पर वह धान लगाते हैं। धान की कटाई के बाद, उनका परिवार काम की तलाश में आंध्र प्रदेश पलायन करता था।
लछमन भी अपने पढ़ाई का खर्चा निकालने के लिए ईंट भट्ठों पर काम किया है। पर अपने मेहनत के बदौलत लछमन डुंडी को, अब लोग एक इनोवेटर के रूप में जानते हैं।

NGO के जरिए सपनों को उड़ान मिली।

लछमन 10 साल के उम्र से ही बुद्धि के बहुत तेज थे। बचपन से ही उन्हें कुछ सीखते रहने की प्रबल इक्क्षा रहती थी। लछमन पढ़ाई में ठीक थे और खासकर उन्हें विज्ञान में दिलचस्पी थी। वह जो कुछ भी स्कूल में पढ़ते, उसपर क्रियाकलाप करना चाहते थे। उनके इसी सीखने की इक्क्षा ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ते रहने के लिए प्रेरित किया। एक NGO के जरिए उन्हें अच्छे स्कूल में दाखिला मिली और उन्हें होस्टल की सुविधा NGO द्वारा मुहैया कराया गया। यहीं से उन्होंने कभी अपने जीवन में पीछे मुड़ कर नही देखा।

दसवीं कक्षा से ही नई-नई चीजों को बनाया।

लछमन जब दसवीं कक्षा में थे तो उनके गाँव में बिजली की बहुत समस्या रहती थी । इस वजह से उन्हें रात को पढ़ाई करने में दिक्क्त होती थी। लेकिन इस समस्या के कारण, उन्होंने पढ़ाई करना नहीं छोड़ा, बल्कि समस्या का समाधान तलाशा। उन्होंने एक साइकिल में डाइनमो लगाया और इससे एक बल्ब को अटैच किया। ताकि साइकिल चलाने पर बिजली बने और उससे बल्ब जलता था। फिर वह पढ़ाई कर पाते थे । उनका लगाव इलेक्ट्रॉनिक चीजों में बढ़ने लगा। अपने आसपास कबाड़ में पड़ी इलेक्ट्रॉनिक चीजों को ही इस्तेमाल करके वह कुछ-कुछ बनाने लगे । दसवीं कक्षा के बाद वह खरियर के इंटरकॉलेज में पढ़ने गए। उनके पढ़ाई में एनजीओ की मदद मिल रही थी। लेकिन साथ में, उन्होंने पार्ट टाइम छोटा-मोटा काम करना भी शुरू कर दिया था।

बंद पड़े नोटों से बिजली बनाई।

Generating electricity from old note of 500

भारत में 2017 में जब नोटबंदी हुई तो उन्होंने बेकार पड़े 500 के नोट से बिजली बना डाली । इस नोट से पांच वाट बिजली बन सकती है । इस कार्य के लिए उन्हें बहुत सराहना मिली । उन्होंने बिजली बनाने के लिए 500 रुपए के नोट पर लगी सिलिकॉन कोटिंग का उपयोग किया। सबसे पहले सिलिकॉन कोटिंग को सीधी धूप में रखा और फिर इसे एक इलेक्ट्रिक वायर की मदद से ट्रांसफॉर्मर से जोड़ा ताकि सिलिकन से मिलने वाली ऊर्जा को इसमें स्टोर किया जा सके। उनके इस कार्य पर प्रधानमंत्री ने भी ओडिशा सरकार से उनके प्रोजेक्ट पर रिपोर्ट मांगी थी।
उन्होंने लड़कियों की सुरक्षा के लिए safety gadgets for women बनाया है। इसे पहनने के बाद, अगर कोई भी उस लड़की से बदतमीजी करता है या उसे छूने की कोशिश करता है, तो इस गैजेट से उसे काफी तेज झटका लगेगा। इससे लडकियां खुद को सुरक्षित रख पाएंगी। लछमन ने अपने परिश्रम के दम पर कई नई-नई चीजों को बनाया है और ख्याति पाई है।

सम्मानित भी हुए है लछमन।

Currency Sanitizing Machine and Oxygen Concentrator

लछमन को उनके कार्य के लिए सम्मानित भी किया गए है। उन्हें इनोवेशन के लिए राज्य स्तर का ‘यूथ इनोवेशन अवॉर्ड’ मिल चुका है। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान ‘ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर’ और currency notes sanitizer machine भी बनाई। उनकी currency note sanitizer मशीन न सिर्फ नोटों को सैनिटाइज करती है, बल्कि असली और नकली नोट की पहचान भी करती है।

लछमन को स्टार्टअप के लिए मदद मिली।

Working on new innovation

अपने इनोवेशन को लोगों तक पहुंचाने के लिए लछमन स्टार्टअप शुरु करना चाहते थे। इसके लिए उन्हें ओडिशा स्टार्टअप पॉलिसी के तहत मदद भी मिली है। उन्होंने ‘Dundi Electronics and Electricals Pvt Ltd‘ के नाम से अपना स्टार्टअप रजिस्टर कराया है। स्टार्टअप शुरू करने के अलावा, उन्हें KIIT-टेक्नोलॉजी बिज़नेस इन्क्यूबेटर प्रोग्राम के तहत NIDHI-EIR फ़ेलोशिप भी मिली है। इस फ़ेलोशिप के अंतर्गत वह एक ‘इंटेलीजेंट बाइक’ पर काम कर रहे हैं।

आज लछमन डुंडी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणाश्रोत है जो अपने जीवन में कुछ करना चाहते है। लछमन ने इनोवेशन के दुनिया में अत्यंत ही सराहनीय कार्य किया है जिसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है।

Sunidhi Kashyap
सुनिधि वर्तमान में St Xavier's College से बीसीए कर रहीं हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सुनिधि अपने खूबसूरत कलम से दुनिया में बदलाव लाने की हसरत भी रखती हैं।
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