25.4 C
Dehradun
Wednesday, June 29, 2022
HomeBlogRudraksha: जानिए, रुद्राक्ष के विविध रूप और उनके धार्मिक, ज्योतिषीय और औषधीय...

Rudraksha: जानिए, रुद्राक्ष के विविध रूप और उनके धार्मिक, ज्योतिषीय और औषधीय महत्व

रुद्राक्ष के बारे में हम सभी जानते हैं। भगवान शिव इसे आभूषण के रूप में पहनते हैं। रुद्राक्ष के बिना महादेव का श्रृंगार ही अधूरा माना जाता है।

शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता में रुद्राक्ष के 14 प्रकार बताए गए हैं। एकमुखी रुद्राक्ष धारण करने वाला कभी गरीब नहीं होता, उस पर मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है, ऐसा शिवपुराण में लिखा है।सावन के पवित्र महीने में हम आपको रुद्राक्ष के प्रकार तथा उससे जुड़ी खास बातें बता रहे हैं। प्रत्येक रुद्राक्ष के कोई न कोई अधिष्ठाता ग्रह तथा देवता होते हैं। इन्हें धारण कर अलग-अलग लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं, जो नीचे दिए गए हैं-

  1. एकमुखी रुद्राक्ष – इन्हें साक्षात शिव माना गया है। पापों का नाश, भय तथा चिंता से मुक्ति, लक्ष्मी प्राप्ति धारणकर्ता को स्वमेव ही प्राप्त होता है। इसके ग्रह सूर्य हैं। धारणकर्ता को शिवजी के साथ सूर्य देवता का भी आशीर्वाद मिलता है।
  2. दोमुखी रुद्राक्ष -यह हर गौरी यानी अर्द्धनारीश्वर का रूप है। इसका ग्रह चन्द्रमा है। इसे धारण करने से जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं। इसे धारण करने से एकाग्रता व शांति प्राप्त होती है। वशीकरण की शक्ति प्राप्त होती है। स्त्री रोग, आंख की खराबी, किडनी की बीमारी दूर करता है।
  3. तीनमुखी रुद्राक्ष -यह ब्रह्म स्वरूप है तथा इसके देवता मंगल हैं। इसे धारण करने से वास्तुदोष, आत्मविश्वास में वृद्धि, ज्ञान प्राप्ति में लाभ होता है। संक्रामक रोग, स्त्री रोगों आदि में लाभ देता है।
  4. चारमुखी रुद्राक्ष – इसके देव ब्रह्मा तथा ग्रह बुध देवता हैं। इसके धारण करने से सम्मोहन की शक्ति आती है। नाक, कान व गले के रोग, कोढ़, लकवा, दमा आदि रोग में लाभ देता है।
  5. पंचमुखी रुद्राक्ष – इसके देवता रुद्र तथा ग्रह बृहस्पति हैं। इसे धारण करने से कीर्ति, वैभव तथा संप‍न्नता में वृद्धि होती है। किडनी के रोग, डायबिटीज, मोटापा, पीलिया आदि में लाभ देता है।
  6. छहमुखी रुद्राक्ष -इसके अधिष्ठाता देवता गणेश एवं कार्तिकेय हैं। ग्रह देवता शुक्र हैं। कोढ़, नपुंसकता, पथरी, किडनी तथा मूत्र रोग आदि के लिए धारण कर सकते हैं।
  7. सातमुखी रुद्राक्ष – इसमें सप्त नाग निवास करते हैं। सप्त ऋषि तथा अनंग देवता अधिष्ठाता हैं। इसके ग्रह शनि महाराज हैं। शारीरिक दुर्बलता, उदर रोग, लकवा, चिंता, हड्डी रोग, कैंसर, अस्थमा, कमजोरी आदि के लिए धारण करते हैं।
  8. आठमुखी रुद्राक्ष – इसमें कार्तिकेय गणेश, अष्टमातृका, अष्ट बसु हैं। इसके ग्रह राहु हैं। अशांति, सर्पभय, चर्म रोग, गुप्त रोग आदि में धारण किया जाता है।
  9. नौमुखी रुद्राक्ष -नौ दुर्गा तथा भैरव इसके देवता हैं तथा ग्रह केतु है। फेफड़े, ज्वर, नेत्र रोग, कर्ण रोग, संतान के लिए, उदर कष्ट, संक्रामक रोगों में शांति के लिए धारण किया जाता है।
  10. दसमुखी रुद्राक्ष -भगवान विष्णु, 10 दिक्पाल तथा दश महाविद्याएं देवता हैं। सभी ग्रह देवता हैं। इसके धारण करने से नवग्रह शांति तथा कफ संबंधी, फेफड़े संबंधी हृदय रोग आदि में लाभ होता है।
  11. ग्यारहमुखी रुद्राक्ष – सभी 11 रुद्र इसके देवता हैं। सभी ग्रह प्रसन्न होते हैं यदि इसे धारण किया जाए। स्त्री रोग, जोड़ तथा स्नायु रोग, वीर्य संबंधी रोग में लाभ देता है।
  12. बारहमुखी रुद्राक्ष – इसके देवता तथा ग्रह सूर्य हैं। इसे धारण करने से तेजस्वी तथा ऐश्वर्य वृद्धि होती है। सिरदर्द, गंज, बुखार, नेत्र रोग, हृदय रोग, मूत्राशय आदि में लाभ देता है।
  13. तेरहमुखी रुद्राक्ष -इसके देवता कामदेव हैं तथा सभी ग्रह हैं। आकर्षण-वशीकरण, सुन्दरता, समृद्धि आदि में लाभ होता है। मूत्राशय, नपुंसकता, गर्भ संबंधी रोग, किडनी, लिवर संबंधी समस्याएं दूर करता है।
  14. चौदहमुखी रुद्राक्ष – इसके देवता श्रीकंठ तथा हनुमानजी हैं। तंत्र-मंत्र, टोने-टोटके, भूत-प्रेत, पिशाच-डाकिनी आदि से रक्षा करता है। निराशा, बेचैनी, भय, लकवा, कैंसर, भूत-प्रेत बाधा आदि में आश्चर्यजनक लाभ देता है।

डिसक्लेमर :-

‘इस लेख में निहित किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है, इसके उपयोगकर्ता इसे महज सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त, इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।’

Sunidhi Kashyap
सुनिधि वर्तमान में St Xavier's College से बीसीए कर रहीं हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सुनिधि अपने खूबसूरत कलम से दुनिया में बदलाव लाने की हसरत भी रखती हैं।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments