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Tuesday, November 29, 2022
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यहां पर्यटकों से महरूम है प्रकृति का ‘स्वर्ग, पढ़िए पूरी खबर

प्रकृति में समय-समय पर बदलाव होते रहता है इसलिए प्रकृति की सुंदरता को बनाए रखने के लिए लोग अपने आस-पास की क्षेत्रों में सफाई करते हैं।

ताकि प्रकृति की सुंदरता बनी रहे। लेकिन आज असीम अमूल्य जीवन में खुशियों के रंग भरने वाली प्रकृति की सुंदरता को वो लोग ही समझ पाते हैं, जो प्रकृति की सुंदरता पर का सुख प्राप्त करते हैं। आज हम आपको अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कार्बेट नेशनल पार्क के बारे में बताएंगे जिसका दो-तिहाई हिस्सा गढ़वाल क्षेत्र में होने के बावजूद इस क्षेत्र में पर्यटकों की तादाद शून्य है। आइये जानते है इसके पीछे की वजह।

कार्बेट नेशनल पार्क के बारे में

कॉर्बेट पार्क भारत का पहला राष्ट्रीय पार्क है, जो सन् 1936 ई. में स्थापित हुआ। पहले इसका नाम हैली नेशनल पार्क था। 1957 में महान प्रकृतिवादी, प्रख्यात संरक्षणवादी स्वर्गीय जिम कॉर्बेट की याद में पार्क को कॉर्बेट नेशनल पार्क के रूप में परिवर्तित किया गया। इसकी दूरी नैनीताल से कालाढूंगी एवं रामनगर होते हुए 118 किलोमीटर है।

दो भागों में है पार्क

कॉर्बेट राष्ट्रीय पार्क 521 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ, यह हिमालय की तलहटी में स्थित है । यह पार्क दो जिलों में फैला हुआ है, पार्क का एक प्रमुख हिस्सा 312.86 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल पौड़ी गढ़वाल जिले में और शेष 208.14 वर्ग किलोमीटर नैनीताल जिले में आता है। यह दो भागों में स्थित है।

बंगाल टाइगर की सुरक्षा

कॉर्बेट नेशनल पार्क भारत के गंभीर रूप से संकटग्रस्त बंगाल टाइगर के संरक्षित क्षेत्र के रूप में कार्य करता है। कॉर्बेट नेशनल पार्क देश के सर्वश्रेष्ठ प्रबंधित और संरक्षित क्षेत्रों में से एक है और हर साल हजारों भारतीय और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करता है। यह पार्क हिमालयन बेल्ट की तलहटी में स्थित है और इसमें शानदार परिदृश्य के साथ विभिन्न भौगोलिक और पारिस्थितिक विशेषताएं हैं। पार्क के प्रवेश द्वार के रूप में चार द्वार हैं, जो अमदंडा द्वार, धनगरही द्वार, खारा द्वार और दुर्गा देवी द्वार हैं।

कोटद्वार गेट का जिक्र नही

कोटद्वार क्षेत्र से कार्बेट नेशनल पार्क में प्रवेश के लिए वन विभाग ने कोटद्वार में कार्बेट टाइगर रिसेप्शन सेंटर तो बना दिया। लेकिन, कार्बेट टाइगर रिजर्व के नक्शे में आज तक इस गेट का जिक्र नहीं किया गया है। नतीजा, नक्शा देख कार्बेट पहुंचने वाला देश-विदेश का पर्यटक आज भी कोटद्वार के बजाय रामनगर से ही कार्बेट में प्रवेश करते हैं। इसलिए कोटद्वार में दर्शकों की संख्या नगण्य है। आलम यह है कि राज्य गठन के वर्षों बाद भी पार्क के रथुवाढाब क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता से आज भी पर्यटकों से महरूम हैं।

Shubham Jha
Shubham वर्तमान में पटना विश्वविद्यालय (Patna University) में स्नात्तकोत्तर के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ शुभम अपनी लेखनी के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। इसके अलावे शुभम कॉलेज के गैर-शैक्षणिक क्रियाकलापों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
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