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Tuesday, November 29, 2022
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कार्यसंस्कृति के लिहाज से नए कलेवर में निखरेगा वन विभाग


उत्तराखंड की वन संपदा ,यहाँ की प्रकृति ने उत्तराखंड की भूमि के कदम-कदम पर अपनी अनोखी चित्रकारी से अनेक रंग भरकर इसके प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगाएं हैं । यहां का प्राकृतिक सौंदर्य ही नहीं बरन यहां का भूभाग भी विस्मित कर देने वाला है ।यहां का आधा भूभाग तो एकदम मैदान हैं तो आधा भूभाग ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों ,पर्वतों, झरनों , ऊंचे ऊंचे पेड़ों , जंगलों तथा बर्फ से ढके हुए हिमालय से बना है।

वन किसी भी समाज का अभिन्न अंग होते हैं। वहां के आर्थिक जीवन का हिस्सा होते हैं। साथ ही साथ वहां के पर्यावरण संतुलन को भी संतुलित रखने में मददगार होते हैं। इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए अब उत्तराखंड का वन महकमा अब नए कलेवर में निखरने जा रहा है। इसके लिए वन मुख्यालय ने पांच सूत्रीय कार्यक्रम निर्धारित किया है।

अधिकारियों को दी गई है जिम्मेदारी।

उतराखंड का वन विभाग अब वन को लेकर सजग दिख रहा है। इसके लिए वन विभाग ने वन मुख्यालय ने पांच सूत्रीय कार्यक्रम निर्धारित किया है। साथ ही अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय कर दी है। लक्ष्य हासिल करने के लिए अधिकारियों को एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। उत्तराखंड में सर्वाधिक क्षेत्र का नियंत्रक होने के कारण यहां के विकास में वन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। बावजूद इसके विभाग की कार्यशैली को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।

चुनौतियों से लड़ने के लिए नई योजना।

उत्तराखंड का वन विभाग हमेशा चुनौतियों से घिरा रहा है। इन चुनौतियों में काम करने वालों की कमी, बदली परिस्थितियों के अनुसार संसाधनों का अभाव, बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष व जंगल की आग जैसी आपदा की चुनौती से वन विभाग लगातार जूझते आया है। इन सभी परेशानियों के निवारण के लिए वन विभाग इस बार पूरा सजग दिख रहा है। एक्शन प्लान तैयार कर वन विभाग भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो इस पर जोड़ दे रहा है।

नई रणनीति के साथ पांच सूत्रीय कार्यक्रम जारी।

वन विभाग के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक राजीव भरतरी के द्वारा नई रणनीति तैयार कर पांच सूत्रीय कार्यक्रम जारी किया गया है। इसके अनुसार ही सभी पदाधिकारियों को काम करने के लिए कहा गया है। ये पांच सूत्रीय कार्यक्रम निम्नलिखित हैं।

1.विभाग में सभी स्तर पर फील्ड कार्मिकों के रिक्त पदों को सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरने पर तेजी से कार्रवाई हो।

  1. विभिन्न संवर्गों की वेतन भत्तों व सुविधाओं से जुड़ी विसंगतियों के निदान को उठाए जाएंगे ठोस कदम ।
  2. मुख्यालय व फील्ड स्तर पर मूलभूत व अतिआवश्यक ढांचागत सुविधाओं के विकास, उपकरणों की उपलब्धता, आइटी के सहयोग पर जोर।
  3. बदली परिस्थितियों के अनुसार सेवारत कार्मिकों के लिए उचित प्रशिक्षण की व्यवस्था
    प्रशासनिक दायित्वों का वितरण व क्षेत्रीय इकाइयों पुनर्गठन इस प्रकार से हो, जिससे वन एवं वन्यजीव सुरक्षा और स्थानीय समुदाय के लिए प्रभावशाली ढंग से कार्यक्रम संचालित हो सकें।

अब देखने वाली बात होगी कि इन पांच सूत्रीय कार्यप्रणाली से वन के संरक्षण में कितना बदलाव हो
पाता है।

Sunidhi Kashyap
सुनिधि वर्तमान में St Xavier's College से बीसीए कर रहीं हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सुनिधि अपने खूबसूरत कलम से दुनिया में बदलाव लाने की हसरत भी रखती हैं।
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