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Wednesday, June 29, 2022
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Vicco: घर-घर जाकर टूथपाउडर बेचने से लेकर करोड़ों की कंपनी खड़ी करने की कहानी

इतिहास गवाह ​​है कि जो लोग हार नहीं मानते वे अंततः सफलता हासिल करते हैं। सफलता हर किसी के जीवन का लक्ष्य है।

जीवन चुनौतियों और अवसरों से भरा है लेकिन केवल उन्हीं लोगों के लिए जो वास्तव में अवसरों को प्राप्त करने और चुनौतियों का सामना करने के लिए संघर्ष करते हैं। कड़ी मेहनत और समर्पण सफलता की यात्रा का एकमात्र मंत्र हैं। उत्साह और कड़ी मेहनत के बिना कोई भी सफलता हासिल नहीं कर सकता। आज हम आपको एक टूथ पाउडर से शुरू होने वाली Vicco कंपनी इंटरनेशनल ब्रांड कैसे बन गई इसके बारे में बताएंगे । आइये जानते है इसके बारे में।

एक छोटे गोदाम से हुई शुरुआत।

Image/ Better India

Vicco कंपनी की शुरुआत बड़ी दिलचस्प है। दरअसल कंपनी के संस्थापक केशव पेंढारकर को इसे शुरू करने का विचार तब आया जब वो एक दिन अपनी किराने की दुकान में बैठे हुए थे। केशव पेंढारकर उस समय 55 साल के थे और उस समय उन्होने यह साहसिक फैसला लिया कि वो अपनी किराने की दुकान को बंद कर एक कॉस्मेटिक ब्रांड की शुरुआत करेंगे। केशव पेंढारकर ने इस काम की शुरुआत करने के लिए अपने एक रिश्तेदार की मदद ली जिनके पास तब आयुर्वेद की डिग्री थी।

घर-घर पसंद करने लगे लोग।

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पहले उत्पाद के तौर पर कंपनी ने दांतों की सफाई के लिए एक पाउडर का निर्माण करना शुरू किया। इस उत्पाद को केशव पेंढारकर के बच्चे खुद घर-घर जाकर बेचने का काम किया करते थे। जल्द ही इस उत्पाद ने लोगों के बीच अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी और कंपनी की ग्रोथ में भी तेजी नज़र आने लगी। साल 1971 में जब केशव पेंढारकर का निधन हो गया, तब कंपनी की ज़िम्मेदारी उनके बेटे गजानन पेंढारकर ने संभाली ली।
विको एक ब्रांड के तौर पर महाराष्ट्र के साथ ही आस-पास से तमाम राज्यों में लोकप्रियता हासिल कर रहा था। स्थापित होते ब्रांड के साथ कंपनी ने इस दौरान स्किन क्रीम और टूथपेस्ट का निर्माण करना भी शुरू कर दिया। इन सब के बीच एक उत्पाद जिसने कंपनी को घर-घर पहुंचा दिया।

Vicco के विज्ञापन हुआ मशहूर।

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Vicco का विज्ञापन इतना मशहूर हुआ कि लोग घर-घर इसे पसंद करने लगे। बच्चों के जुबान पर यह विज्ञापन आ गया। अभी तक लोग इस विज्ञापन को नही भूले हैं। कंपनी की लगातार बढ़ती लोकप्रियता उसके व्यापार को भी तेजी से ऊपर ले जाने का काम कर रही थी। साल 1994 में कंपनी ने 50 करोड़ रुपये के टर्नओवर को भी पहली बार पार कर लिया। मालूम हो कि नागपुर में अपना पहला प्लांट स्थापित करने वाली कंपनी विको आज महाराष्ट्र और गोवा में कई फैक्ट्रियों का संचालन कर रही है।

विदेशों में भी सफलता हासिल।

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भारत के घर-घर में पहचान बनाने वाली इस कंपनी ने अपने 50 से अधिक उत्पादों को 45 से भी अधिक देशों तक पहुंचाने का काम किया है। गौरतलब है कि कंपनी की शुरुआत करने वाले पेंढारकर परिवार के 35 सदस्य आज भी कंपनी में अलग-अलग जिम्मेदारियाँ संभाल रहे हैं, जिसमें परिवार की महिला सदस्य भी शामिल हैं। कंपनी अब साल 2025 तक अपने उत्पादों को 50 से अधिक देशों तक लेकर जाना चाहती है।

कड़ी मेहनत करने से ही मनुष्य अपने भविष्य को सर्वश्रेष्ठ बना सकता हैं । जब लोग अपने जीवन में कामयाब होते हैं सफलता प्राप्त करते हैं वो कड़ी मेहनत की वजह से संभव होता है।

Sunidhi Kashyap
सुनिधि वर्तमान में St Xavier's College से बीसीए कर रहीं हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सुनिधि अपने खूबसूरत कलम से दुनिया में बदलाव लाने की हसरत भी रखती हैं।
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