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Wednesday, October 5, 2022
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गायों की तो सब सेवा करते हैं, पर ये युवक 2000 बैलों तक रोज़ पहुंचाते हैं खाना

जीव-जंतु मानव जाती के लिए सदैव से ही उपकारी रहा है। और वो हमेशा ही मनुष्य को किसी न किसी प्रकार से सुख सुविधा प्रदान करता है।

हमारी धरती पर लगभग जीव जंतु की 87 लाख प्रजातियां हैं।कुछ प्रजातियों की पहचान होना अभी भी बाकि है और कुछ लुप्त होती जा रही है। और जो है उनमे से पालतू जीव हमारे लिए बहुत अधिक महत्व रखते हैं। आज हम आपको कुछ युवाओं के बारे में बताएंगे जो पशुओं से बहुत प्रेम करते हैं। आइये जानते है उनके बारे में।

यूथ नेटवर्क की शुरुआत

गाज़ियाबाद के मयंक चौधरी और उनके यूथ नेटवर्क से जुड़े लोगों के द्वारा जनवरी 2020 में एक नई पहल की शुरुआत की, जिसका नाम है-चारा कार। यह यूथ नेटवर्क रोजाना पशुओं के लिए काम कर रहा है। कचरे में फेंके गए रोटियों को सीधा जानवरों तक पहुँचाकर मयंक और उनकी टीम पशुओं की सेवा कर रही है।

चुनौतियों से घबराया नही

मयंक और उनके युथ नेटवर्क की टीम के सामने कई चुनौतियां आई पर उनकी टीम ने इस चुनौतियों से डटकर सामना क़िया। जब इस नेटवर्क की समस्या थी कि लोग जानेंगे कैसे। पर इसकी मेहनत के बदौलत लोग चारा कार के बारे में जाने भी और मदद भी की। शुरुआती दिनों में लोगों को लगा कि यह नया पहल ज्यादा दिनों तक नही टिक पाएगा पर मयंक और उनकी टीम के परिश्रम ने लोगों को यह विश्वास दिलाया कि उनका कार्य सही दिशा में है।

लोगों ने की मदद

मयंक और उनकी यूथ टीम की मदद लोगों ने खूब की। चारा कार जहाँ एक गाड़ी पर सीमित थी वहीं लोगों के मदद से आज मयंक की टीम के पास 3 चारा कार है। चारा कार लोगों के घर तक जाती है और ग्रीन वेस्ट इकठ्ठा करती है। लोग बेसब्री से चारा कार का इंतजार करते हैं। इसके माध्यम से तक़रीबन 10 हजार घरों से रोज का सैकड़ों किलो चारा इकट्ठा किया जा रहा है।

बैलों को खिलाया जाता है हरा चारा

मयंक की टीम द्वारा घर से इकट्ठा किया गया चारा, गाज़ियाबाद के ही एक नंदी गृह में भेजा जाता है। यहाँ लगभग 2000 नंदी (बैल) रहते हैं। रोजाना यहाँ चारों को लाया जाता है। अब लोग भी मयंक और उनकी टीम का पूरा सहयोग कर रहे हैं। घरों के अलावा चारा कार कुछ रेस्टॉरेंट्स, बाजार में सब्जी और जूस की दुकानों से भी ग्रीन वेस्ट चारा जमा करती है।

कोरोना काल में मरीजों की सेवा

कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन में जब सबकुछ बंद था तो चारा कार का उपयोग गाज़ियाबाद में ऑक्सीजन सप्लाई और कोविड मरीजों तक खाना पहुंचाने के लिए किया जाता था। लॉकडाउन के बाद पुनः चारा कार अपने काम पे लगा हुआ है। आज लोगों का विश्वास बन चुका है चारा कार।

चारा कार को हर जगह पहुँचाने की योजना

मयंक और उनकी टीम के द्वारा चारा कार को और वृहद करने की योजना है। आने वाले समय में मयंक और उनकी टीम दिल्ली के अन्य इलाकों में भी इस तरह की चारा कार को शुरू करना चाहते हैं। आज मयंक सभी लोगों के लिए प्रेरणा स्वरूप हैं। लोगों को मयंक और उनकी टीम से सीखने की जरूरत है।

Shubham Jha
Shubham वर्तमान में पटना विश्वविद्यालय (Patna University) में स्नात्तकोत्तर के छात्र हैं। पढ़ाई के साथ-साथ शुभम अपनी लेखनी के माध्यम से दुनिया में बदलाव लाने की ख्वाहिश रखते हैं। इसके अलावे शुभम कॉलेज के गैर-शैक्षणिक क्रियाकलापों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।
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1 COMMENT

  1. WHAT ARE THESE GADWALI LIMPDICKS DOING ? Y NOT BAN BEEF SALE IN GADWALI BABA LAND ?

    BEEF IS GOOD FOR THEIR LIMPDICKS ! THESE GADWALI KSHATRIYA COWARDS AND LIMPDICKS SOLD THEIR WOMEN TO AKBAR AND HAD THEM RAPED IN FRONT OF THEIR EYES ! LIKE THAT RAAAAND KAYAR PRITHVIRAJ CHAUHAN WHOSE RANDII WIFE WAS RAPED IN KABUL IN FRONT OF THE LIMPDICK PRITHVIRAJ CHOOHA- HAN !

    IT IS THE DNA OF THE KSHATRIYAS AND RAJPUT WEASELS ! THEY ARE LIMPDICKS ,COWARDS AND SONS OF PROSTITITES

    Kshatriyas – As per the Mahabharata, Kshatriyas were born, when Kshatriya women (on heat) “were raped by Brahmins”, w/o marriage and hence, were “born as a bastard race” with the “zero IQ and potency of Brahmins” and the “cowardice, treachery and chicanery of the Brahmins”

    SECTION LXIV – Mahbharata – Adivansavatarana Parva

    The son of Jamadagni (Parasurama), after twenty-one times making the earth bereft of Kshatriyas wended to that best of mountains Mahendra and there began his ascetic penances.

    And at that time when the earth was bereft of Kshatriyas, the Kshatriya ladies, “desirous of offspring”, used to come, O monarch, to the Brahmanas and Brahmanas of rigid vows had connection with them during the womanly season alone, but never, O king, lustfully and out of season.

    And Kshatriya ladies by “thousands conceived from such connection” with Brahmanas.

    Jats

    The Hindoo Bindoo claim that Jats are born from the “Jata of Shankar”

    Jats are proven to be of “Central Asian/Scythian Origin”, and were “basically pirates,bandits and mercenaries”.

    Their only claim to fame is the “sacking of the TajMahal”, which they looted and pillaged, and made their own Jai Mahal, and their “digging up and defiling” of the “grave and bones”, of Akbar (by dragging the bones out)

    Rajputs

    “The word “Rajput” is used in certain parts of Rajasthan to denote the illegitimate sons of a Kshatriya chief or Jagirdar.” [Mahajan Vidya Dhar,”Ancient India”, Fifth Edition, Reprint 1972, Chand and Co., New Delhi. p. 550 ff.])

    This explains Rajput history – QED !

    Sikhs

    A race pillaged the Dindoo Brahmins and Dogra rat Rajputs, who had their Gurus killed due to Dindoo Hindoos and whose Golden Temple was under the Control of Brahmins with Hindoo Idols in it (till around early 1900s).Their Constantine – Ranjit achieved his victory only due to the American and French Generals – running his artillery and cavalry !

    After the death of Ranjit Singh his wife and sons were killed by the Dogra Rats

    Yadavs

    As per the Gita, Lord Krishna considered Yadav’s to be “a curse on the planet and tried to exterminate all the Yadavs”

    When Krsna had killed the demons, and thus relieved the burden of the earth, he thought, ‘The earth is stilloverburdened by the unbearably burdensome race of the Yadus. No one else can overcome them, since theyare under my protection.’ … Deluded by Krsna’s power of delusion, and cursed by the Brahmins, they were all destroyed, and when his entire family had been destroyed, Krsna said, ‘The burden has been removed.’ ” — Srimad Bhagavatam 10:90:27-44; 11:1:1-4; 11:30:1-25

    As per the Mahabharata, after Krishna was killed, “his wives were raped and molested by Robbers”, and the “offspring so born”, were called Yadavs

    Mahabharata, Book 16: Mausala Parva: Section 7

    The concourse was very large. The robbers assailed it at different points. Arjuna tried his best to protect it, “but could not succeed”. In the very sight of all the warriors, many “foremost of ladies were dragged away, while others went away with the robbers of their own accord” .

    Those Mlecchas, however, O Janamejaya, in the very sight of Partha, retreated,”taking away” with them, many “foremost ladies” of the Vrishnis and Andhakas

    This explains Yadav history – QED !

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