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Wednesday, June 29, 2022
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Tokyo Olympics 2020: कभी हाकी स्टिक और जूते खरीदने के नहीं थे पैसे, आज बनीं टोक्यो का चमकता सितारा

नारी आज के बदलते परिवेश में जिस तरह पुरुष वर्ग के साथ कंधे से कंधा मिलाकर प्रगति की ओर अग्रसर हो रही है, वह समाज के लिए एक गर्व और सराहना की बात है।

आज राजनीति, टेक्नोलोजी, सुरक्षा, खेल-कूद समेत हर क्षेत्र में जहां -जहां महिलाओं ने हाथ आजमाया उसे कामयाबी ही मिली। अब तो ऐसी कोई जगह नहीं है, जहां आज की नारी अपनी उपस्थिति दर्ज न करा रही हो और इतना सब होने के बाद भी वह एक गृहलक्ष्मी के रूप में भी अपना स्थान बनाए हुए है। आज हम आपको वंदना कटारिया के बारे में बताएंगे जिन्होंने अपने भारतीय टीम के लिए तीन गोल किए और ओलंपिक्स इतिहास में हेट्रिक लगाने वाली पहली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी भी बन गईं। आइये जानते है उनके बारे में।

वंदना कटारिया का परिचय।

वंदना कटारिया मूलत: हरिद्वार के रोशनाबाद की रहने वाली हैं। बचपन में वंदना को उनके आस-पड़ोस के लोगों ने कहा था कि एक लड़की के लिए खेल ठीक नहीं है। रोशनाबाद के बुजुर्गों की नजर में लड़की का खेलना अनुचित था। ऐसे में वंदना चुपके से सबसे बचते-बचाते पेड़ों की शाखाओं की मदद से खेलती थीं और अपने हॉकी मूव्स की प्रैक्टिस करती थी। वंदना के पिता हरिद्वार BHEL भेल में काम करते थे। पिता की ही देख-रेख में वंदना ने हॉकी खेलना शुरु किया था। आज वंदना कटारिया भारत की सुपरस्टार बन गई हैं। शनिवार को खेले गए पूल ए मुकाबले में भारतीय हॉकी टीम ने साउथ अफ्रीका को 4-3 से हराकर क्वार्टर फाइनल के लिए अपना दावा पेश कर दिया है। इस मुकाबले में वंदना कटारिया ने तीन गोल किए और ओलंपिक्स इतिहास में हेट्रिक लगाने वाली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी भी बन गईं।

बचपन से वंदना थी अव्वल खिलाड़ी।

वंदना हॉकी से पहले खो-खो खेलती थीं। 2002 में खो-खो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में वंदना ने शानदार खेल दिखाया था। 11 वर्ष की वंदना की एनर्जी देखकर कोच कृष्ण कुमार ने उन्हें हॉकी में उतारा था। वंदना ने हॉकी की शुरुआती ट्रेनिंग मेरठ के एनएएस कॉलेज स्थित हॉकी मैदान पर कोच प्रदीप चिन्योटी के मार्गदर्शन में ली थी। वंदना ने मेरठ में 2004 से 2006 तक प्रशिक्षण लिया और जिले से लेकर प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। 2007 की शुरुआत में वंदना का चयन लखनऊ स्थित हॉकी हॉस्टल में हो गया था।

छुट्टियों में घर जाना नही था पसंद।

घर की आर्थिक स्थिति ठीक ने होने के कारण उन्हें अच्छी किट और हॉकी स्टिक खरीदने में दिक्कत होती थी। वंदना के सामने कई मौके ऐसे भी आए जब हॉस्टल की छुट्टियों में साथी खिलाड़ी घर चले जाते थे, लेकिन वो पैसों की कमी के कारण घर नहीं जा पाती थीं। ऐसे में उनके कोच मदद के लिए आगे आते थे। वंदना ने अपने मेहनत के दम पर आज यह मुकाम हासिल किया है। आज वह हर जगह पहचानी जा रही है।

लगातार सफलता के शिखर पर वंदना।

वंदना को 2007 में भारतीय जूनियर टीम में चुना गया था। वहीं 2010 में इनको सीनियर राष्ट्रीय टीम में चुना गया। वंदना ने 2013 में जापान में हुई तीसरी एशियन चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था। 2014 में कोरिया में हुए 17वें एशियन गेम्स में वे कांस्य पदक विजेता रहीं। 2016 में सिंगापुर में हुई चौथी एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता बनीं। 2018 में जकार्ता में हुए एशियाई खेल में रजत पदक विजेता थीं जबकि 2018 में गोल्ड कोस्ट में हुए 11वें राष्ट्रमंडल खेल में चौथे स्थान पर रहीं। अब वंदना के कारण भारतीय हॉकी टीम ने साउथ अफ्रीका को 4-3 से हराकर क्वार्टर फाइनल के लिए अपना दावा पेश कर दिया है। इस मुकाबले में वंदना कटारिया ने तीन गोल किए और ओलंपिक्स इतिहास में हेट्रिक लगाने वाली भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ी भी बन गईं हैं।

आज पूरे देश को वंदना कटारिया पर गर्व है। इतने मुश्किलों के बावजूद आज उन्होंने अपने मेहनत के बदौलत सफलता प्राप्त किया है। वंदना आज सभी के लिए प्रेरणा हैं।

Sunidhi Kashyap
सुनिधि वर्तमान में St Xavier's College से बीसीए कर रहीं हैं। पढ़ाई के साथ-साथ सुनिधि अपने खूबसूरत कलम से दुनिया में बदलाव लाने की हसरत भी रखती हैं।
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