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Wednesday, June 29, 2022
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हरेला पर दून में चला अभियान, एक घंटे में पांच लाख पौधे लगाकर बनाया कीर्तिमान

उत्तराखंड की धरती पर ऋतुओं के अनुसार कई अनेक पर्व मनाए जाते हैं। यह पर्व हमारी संस्कृति को उजागर करते हैं , वहीं पहाड़ की परंपराओं को भी कायम रखे हुए, इन्हीं खास पर्वो में शामिल, हरेला उत्तराखंड में एक लोकपर्व है। हरेला शब्द का तात्पर्य हरयाली से हैं। यह पर्व वर्ष में तीन बार आता हैं। पहला चैत मास में दूसरा श्रावण मास में तथा तीसरा व् वर्ष का आखिरी पर्व हरेला आश्विन मास में मनाया जाता हैं। इस बार भी उत्तराखंड की धरती पर यह पर्व बड़े जोश के साथ मनाया गया है।

श्रावण महीने के आगमन से पहले मनाया जाता है हरेला।

उत्तराखंड के लोगो द्वारा श्रावण मास के पहले हरेले को मनाया जाता है। क्योंकि श्रावण मास शंकर भगवान जी को विशेष प्रिय है। सावन लगने से नौ दिन पहले पांच या सात प्रकार के अनाज के बीज एक रिंगाल को छोटी टोकरी में मिटटी डाल के बोई जाती हैं| इसे सूर्य की सीधी रोशनी से बचाया जाता है और प्रतिदिन सुबह पानी से सींचा जाता है। 9 वें दिन इनकी पाती की टहनी से गुड़ाई की जाती है और दसवें यानि कि हरेला के दिन इसे काटा जाता है। और विधि अनुसार घर के बुजुर्ग सुबह पूजा-पाठ करके हरेले को देवताओं को चढ़ाते हैं| उसके बाद घर के सभी सदस्यों को हरेला लगाया जाता हैं।

1 घंटे में पांच लाख पौधे लगाकर नया कीर्तिमान स्थापित।

इस बार हरेला पर्व देहरादून में धूमधाम के साथ मनाया गया। इस उपलक्ष्य में जिले में पौधारोपण का महाअभियान चलाया गया। महज एक घंटे में जिले में पांच लाख से अधिक पौधे रोप कर रिकार्ड स्थापित किया गया। जिला प्रशासन ने इस बार हरेला पर चार लाख पौधे रोपने का लक्ष्य रखा था। जबकि, पिछले साल हरेला पर कुल तीन लाख 53 हजार पौधे रोपे गए थे। इस बार नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए जिला प्रशासन ने सभी को यह संदेश दिया कि प्रकृति के संरक्षण के लिए पेड़ कितना महवपूर्ण है।

जिला पदाधिकारी के साथ सभी लोगों का प्रयास सराहनीय।

पूरे जिला स्तर पर चलाए गए इस महाअभियान में प्रशासन के साथ अन्य लोगों की भूमिका सराहनीय रही। जनपद में वन प्रभागों, विकासखंडों व नगरीय निकायों ने विभिन्न प्रकार के फलदार व वन प्रजातियों के कुल पांच लाख 436 पौधे रोपे। यह पौधारोपण दोपहर में किया गया। इसका सजीव प्रसारण मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष सिटी पार्क में किया गया। जिलाधिकारी डा. आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि विकासनगर, सहसपुर, रायपुर व मसूरी वन प्रभाग में कुल चार स्थानों पर ड्रोन के माध्यम से फोटोग्राफी व वीडियो कवरेज की गई।

विभिन्न जगहों पर पौधारोपण का कार्य प्रशंसनीय।

हरेला को लेकर जिले के लगभग हर जगह पर सभी लोग अत्यंत उत्साहित थे। इस बार नया कृतिमान के साथ नगर निकायों के लिए 15000 पौधों की व्यवस्था एमडीडीए की ओर से की गई। जिले में जौनसार क्षेत्र के विकासखंड चकराता में 60500, कालसी में 54500, चकराता वन प्रभाग में 55021, कालसी वन प्रभाग में 35000 पौधे रोपे गए। विकासनगर में 38000, सहसपुर में 37000, नगर पालिका परिषद क्षेत्र विकासनगर में 1500, नगर पालिका क्षेत्र हरबर्टपुर में 1000
देहरादून के नगर निगम क्षेत्र में 5030, नगर पालिका मसूरी क्षेत्र में 1000, मसूरी वन प्रभाग में 55000, देहरादून वन प्रभाग में 70000 पौधे रोपे गए। इसी प्रकार जनपद के परवादून क्षेत्र में नगर पालिका डोईवाला क्षेत्र में 2000, विकासखंड डोईवाला में 12565, नगर निगम ऋषिकेश में 2420, विकासखंड रायपुर में 13000 पौधे लगाए गए ।व जनपद के विभिन्न जोन में मुख्य उद्यान अधिकारी कार्यालय ने क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से 56900 पौधे लगवाए। इस प्रकार नए कृतिमान के साथ हरेला पूरे जोश के साथ मनाया गया। हर साल को पीछे छोड़ते हुए पांच लाख पौधों के साथ इस बार का हरेला नया रिकॉर्ड स्थापित किया।

पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के द्वारा भी मनाया गया यह पर्व।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी इस पर्व के प्रधानता के बारे में बताया। वेबिनार के माध्यम से जुड़े पूर्व मुख्यमंत्री ने हरियाली की पूजा अर्चना की। उन्होंने कहा कि हरेला हमारी परंपरा, हमारी संस्कृति का प्रतीक है। उधर हरेला पर भाजपा महानगर अध्यक्ष सीताराम भट्ट के नेतृत्व में महानगर के सभी 860 बूथों पर पौधारोपण किया गया। सभी बूथों पर 10-10 पौधे लगाए गए।

महिला मोर्चा के साथ विभिन्न संस्था ने भी मनाया पर्व।

भाजपा महिला मोर्चा अध्यक्ष व हरेला पर्व की संयोजक कमली भट्ट के नेतृत्व में महानगर से लेकर मंडल व बूथ स्तर तक सैंकड़ों महिलाओं ने वृहद स्तर पर अभियान चलाया। जिसके तहत हजारों पौधे रोपे गए। हरेला के मौके पर कोरोना योद्धा डाक्टर एवं स्टाफ ने दून अस्पताल में पौधे रोपे। कोरोना से मृतकों की आत्मशांति के लिए प्रार्थना भी की गई। हरेला पर्व के मौके पर छात्र, शिक्षक और अभिभावकों ने बढ़चढ़ कर पौधारोपण किया। स्कूल परिसर में शिक्षक एवं कर्मचारियों ने पौधे रोपे।

इस तरह उत्तराखंड में यह पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। पर्व के साथ जरूरी है लोग ऐसे ही पर्यावरण को लेकर गंभीर रहे। पर्यावरण हमारे लिए अत्यंत ही आवश्यक है। आने वाले भविष्य के लिए आज से हमें सजग होना पड़ेगा। इस बार के हरेला पर्व को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि उत्तराखंड के लोग ऐसे ही प्रकृति का रक्षा करें।


Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।
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