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Wednesday, June 29, 2022
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बिहार: भाई-बहन की जोड़ी ने बनाया सोलर -स्टोरेज, कीमत सिर्फ 10 हज़ार रुपये

भंडारण के अभाव में बड़ी मात्रा में फल और सब्जियां समय से पहले खराब हो जाते हैं। बिजली की बचत के साथ-साथ कोल्ड- स्टोरेज कृषि उत्पादों के खराब होने की समस्या दूर करती है। कोल्ड-स्टोरेज के भीतर निम्न तापमान और उच्च सापेक्ष आर्द्रता भी होता है जिससे फलों, सब्जियों को ताजा रख सकते है। इसके अलावा अन्य सब्जियों और फलों, जैसे- पालक, शिमला मिर्च, ककड़ी, लौकी, तौरई और पपीते को भी इसके द्वारा सुरक्षित रखा जा सकता है। आज हम आपको एक ऐसे ही भाई-बहन के बारे में बताएंगे जिन्होंने किसानों के समस्याओं को देखते हुए एक सस्ता कोल्ड -स्टोरेज का निर्माण किया है।आइये जानते है उनके बारे में।

निक्की झा और रश्मि झा का परिचय।

निक्की झा और रश्मि झा दोनों बिहार के भागलपुर जिले में नया टोला दुधैला के रहने वाले हैं ।
निक्की झा ने नालंदा यूनिवर्सिटी से, इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट स्टडीज में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है और उनकी बहन, रश्मि झा एक बायोटेक्नोलॉजिस्ट हैं। दोनों भाई-बहन है । दोनों ने मिलकर किसानों के समस्याओं को देखते हुए एक खास तरह का स्टोरेज बनाया है जिसका नाम उन्होंने ‘सब्जीकोठी’ दिया है। इस सब्जीकोठी के द्वारा किसान अपने फलों-सब्जियों को 3 से 30 दिनों तक सुरक्षित रख सकते हैं।यह आसानी से एक जगह से दूसरे जगह ले जाया जा सकता है। इस सिस्टम को परिवहन में भी उपयोग में ला सकते है । इसमें फल और सब्जियों पर किसी भी तरह के हानिकारक सूक्ष्मजीव नहीं लगते हैं। यह किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है।

बहन का मिला साथ।

निक्की कुमार झा की बहन रश्मि ने उनके इस योजना में उनका भरपूर साथ दिया । उनकी बहन ने ही उन्हें इस योजना के बारे में जानकारी दी। अपने पढ़ाई के दौरान निक्की ने किसानों की समस्या को हल करने की सोची और एक कोल्ड स्टोरेज सिस्टम तैयार किया। उनका यह सिस्टम सौर संचालित था। लेकिन उनका यह प्रयोग विफल रहा, क्योंकि बारिश के मौसम में यह कामयाब नहीं हुआ।

सप्तकृषि की शुरुआत।

निक्की ने ऐसे स्टोरेज सिस्टम के बारे में रिसर्च किया, जिसमें रेफ्रिजरेशन की जरूरत न हो। जैसे-जैसे वह आगे बढ़े, उन्होंने ‘सब्जीकोठी’ को तैयार किया। अपने इस इनोवेशन को लोगों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने रश्मि के साथ मिलकर, 2019 में अपना स्टार्टअप, सप्तकृषि शुरू किया। इसकी शुरुआत 250 किलोग्राम की क्षमता से होती है और अन्य दो मॉडल, 500 किलोग्राम और 1000 किलोग्राम के हैं। एक सामान्य रेफ्रीजिरेटर की तुलना में सब्जीकोठी 10 गुना अधिक फल-सब्जियां रख सकती है। इसमें बहुत कम बिजली की खपत होती है। इसकी लागत अन्य कोल्ड स्टोरेज से बहुत ही कम है। सब्जीकोठी की कीमत 10 हजार रुपए से शुरू होती है।

अन्य जगहों से भी साथ मिला।

निक्की के इस स्टार्टअप को पहले आईआईटी पटना से इन्क्यूबेशन मिला था और अब आईआईटी कानपुर द्वारा उन्हें डिज़ाइन और फण्डरेजिंग में मदद मिल रही है। सप्तकृषि को RKVY-RAAFTAR मिशन द्वारा SKUAST-Jammu से भी सपोर्ट मिल रहा है। साथ ही, उन्हें AGNIi मिशन, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय के तहत एक प्रमुख पहल, और प्रधान मंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सलाहकार परिषद (PM-STIAC) ​​के तहत नौ प्रौद्योगिकी मिशनों में से एक के सहयोग से समर्थन मिला। उन्हें IIT- कानपुर द्वारा समर्थित विल्ग्रो के इनोवेशन प्रोग्राम से भी मदद मिली है।

किसानों ले लिए मददगार सब्जीकोठी।

सब्जीकोठी के मॉडल

किसानों के लिए यह सब्जी कोठी काफी मददगार साबित हो रही है। कम लागत से बनी यह कोठी किसान आसानी से ले सकते है । किसानों के समस्याओं को समझते हुए ही इसके कीमत को कम रखा गया है । सब्जी-फल आसानी से इसमें अधिक दिनों तक रख सकते है। किसानों के आय में इससे वृद्धि होने की संभावना अधिक है। सब्जीकोठी को किसान ट्रांसपोर्टेशन में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

निक्की को मिले है पुरस्कार।

मिले हैं पुरस्कार

इस आविष्कार के लिए उन्हें 3M CII Young Innovators Challenge Award, 2020 में भी अवॉर्ड मिला है और छठे इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल, 2020 में भी सम्मान मिला है । किसानों के मदद के लिए बनाया गया सिस्टम सचमुच कारगर है। निक्की के इस कार्य से वो
अब लोगों के लिए प्रेरणा बन गए है। आज उनके इन शुरुआत से किसानों को काफी हद तक लाभ पहुँच रहे है।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।
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