उत्तराखंड

श्री गुरु तेग बहादुर जी शहादत को सिज़दा किया दून वासियों ने ।

350वें शहादत वर्ष के उपलक्ष्य में

श्री गुरु तेग बहादुर जी शहादत को सिज़दा किया दून वासियों ने ।

उत्तराखंड (देहरादून) रविवार, 23 नवंबर 2025

श्री गुरु तेग बहादुर ज , उनके शिष्य भाई मती दास जी, भाई सती दास जी और भाई दयाल जी के 350वें शहादत वर्ष के उपलक्ष्य में , उनके द्वारा धर्म और मानवता की रक्षा के लिए 1675 में किए गए महान अनोखे बलिदान को नमन करने , सिज़दा करने हेतु मानो सारा देहरादून शहर ही उमड़ पड़ा ।

गुरुद्वारा श्री गुरु हरकृष्ण साहिब पटेलनगर से आरंभ हुआ प्रभाती नगर कीर्तन सचमुच ही इतिहास में दर्ज हो गया। ठंड के बावजूद प्रातः 4 बजे से ही सिक्ख संगत का आगमन पटेलनगर गुरुद्वारे में शुरू हो गया था। 6 बजे जब नगर कीर्तन आरंभ हुआ तो सिक्ख संगत का अति उत्साह प्रतीत होने लगा।

लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबे इस नगर कीर्तन में सबसे आगे जीप के ऊपर सजाया हुआ अजीत नगाड़ा बज उठा । पीछे मोटर साइकिलों पर सवार सिक्ख युवक, उसी कतार में लगे जंगी घोड़े, घोड़ों के ऊपर सिक्ख वेशभूषा में सजकर बैठे बच्चे, उनके पीछे सजे जंगी ऊंट। इतिहास को उजागर करते कईं वाहनों पर लगे श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन संबंधित विशाल चित्र, उन चित्रों में आवाज डालते एक वाहन पर सजाए सिक्ख जंगी शस्त्र , गुरु तेग बहादुर जी द्वारा रचित बाणी का गायन , गतके के जौहर दिखाते वीर सिक्ख , पंजाब से आई खास पाइप बैंड की टीमें , बोले सो निहाल के जयकारों से गुंजायमान रही कल के देहरादून की सुबह।

नगर कीर्तन की शोभा को चार चांद लगा दिए एक बड़े ट्राले को अति सुंदर ढंग से सजा कर बनाई गई पालकी ने , जो केवल पालकी ही नहीं एक पूर्ण गुरुद्वारा लग रही थी। ट्राले के ऊपर श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी तो सुशोभित थे ही, साथ ही कीर्तन करने वाले श्री गुरु हरकृष्ण साहिब कीर्तन अकादमी के बच्चों का जत्था , संगत और प्रसाद वितरण का खास प्रायोजन था । पालकी की अगुआई पंज प्यारे कर रहे थे , जिनके साथ नरसिंहा बज रहा था।

नगर कीर्तन में बाबा बन्द सिंह बहादुर अखाड़ा, बाबा दीप सिंह अखाड़ा, बाबा अजीत सिंह अखाड़ा, बेबे नानकी जत्था, क्लास गुरुघर सोसाइटी, बाबा फतह सिंह प्रभाती जत्था के साथ मुख्य रूप से, गुरु तेग बहादुर चैरिटेबल अस्पताल, उत्तराखंड सिक्ख कोआर्डिनेशन कमेटी, गुरुद्वारा रेस्ट कैंप, गुरुद्वारा गोविंदनगर रेसकोर्स , आदि के साथ साथ सारे शहर की सिक्ख संगत शामिल रही।

नगर कीर्तन तो भव्य, सुसंचालित, अतिव्यवस्थित तो था ही खास बात यह थी सुबह 9 बजे प्रिंस चौक से जब पालकी साहिब त्यागी रोड का रुख कर गई तो पता ही नहीं चला कि शहर में कोई इतना विशाल आयोजन हुआ है, ना कहीं जाम , ना कही कोई परेशान होता दूनवासी, ना कहीं कोई भीड़ में हांफती स्कूली बच्चों की बस, ना ही बेबस पुलिस प्रशासन जो एक बहुत बड़ी सीख अन्य धार्मिक एवं समाजिक संस्थाओं और जिला प्रशासन को इस नगर कीर्तन से मिल पाई होगी।


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