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Wednesday, June 29, 2022
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दो स्वरूप में मौजूद है ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, इस जगह आकर देख सकते हैं नर्मदा और कावेरी नदियों का संगम

देवों के देव देवाधिदेव महादेव ही एक मात्र ऐसे भगवान हैं, जिनकी भक्ति हर कोई करता है। चाहे वह इंसान हो, राक्षस हो, भूत-प्रेत हो अथवा देवता हो। यहां तक कि पशु-पक्षी, जलचर, नभचर, पाताललोक वासी हो अथवा बैकुण्ठवासी हो। हिंदू धर्म में वेद-पुराणों के अनुसार जहां-जहां भगवान शिव अपने भक्तों की भक्ति से प्रसन्न होकर खुद प्रकट हुए उन बारह स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। आज हम आपको ज्योतिर्लिंगों में से एक ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में बताएंगे।

नर्मदा के तट पर विराजित हैं ओंकारेश्वर।

ओंकारेश्वर धाम मध्य प्रदेश की मोक्ष दायिनी कही जाने वाली नर्मदा नदी के तट पर बसा हैं। यहां विराजित ज्योतिर्लिंग के दर्शन हेतु नर्मदा पर बने पुल के माध्यम से उस पार जाना पड़ता हैं। नर्मदा नदी के बीच मन्धाता व शिवपुर नामक द्वीप पर ओंकारेश्वर पवित्र धाम बना हुआ हैं।

नर्मदा नदी स्वतः प्रकट हुई थी।

जब भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग यहां विराजमान हुआ था तब नर्मदा नदी यहां स्वतः ही प्रकट हुई थी। आस्था हैं कि भगवान शिव के पवित्र ज्योतिर्लिंग के दर्शन हेतु पहले नर्मदा में स्नान कर पवित्र डूबकी लगाना पड़ती हैं। जिससे भगवान शिव प्रसन्न होकर अपने भक्तों की कामना पूरी करते हैं। यहां विराजित भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही अनेक मनोकामना पूर्ण हो जाती हैं तथा भगवान शिव का अपरंपार आशीर्वाद बना रहता हैं।

ज्योतिर्लिंग के बारे में पौराणिक कथा।

ओंकारेश्वर पवित्र धाम को लेकर कई प्रकार की कथाएं प्रचलित हैं। बताया जाता हैं कि ओंकारेश्वर धाम मन्धाता द्वपि पर स्थित हैं। मन्धाता द्वीप के राजा मान्धाता ने यहां पर्वत पर घोर तपस्या की थी। जिससे प्रसन्न हुए भगवान शिव से राजा ने वरदान स्वरूप यही निवास करने का वरदान मांगा। जिसके बाद भगवान ने राजा के वचन अनुसार यहां पवित्र ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव विराजमान हुए एवं राजा के राज्य में रहने वाली हर जनता की सुरक्षा एवं रक्षा भगवान शिव स्वयं करते रहें। प्राचीन कथाओं के अनुसार ओंकारेश्वर को तीर्थ नगरी ओंकार-मान्धाता के नाम से भी प्राचीन समय में जाना जाता है।

33 करोड़ देवी-देवताओं का वास।

ओंकारेश्वर को लेकर कई मान्यता हैं जो इस तीर्थ के प्रति एक नई आस्था को हर रोज मनुष्य में उतपन्न करती हैं। कहा जाता हैं कि यहां पर 33 करोड़ देवी देवताओं का वास हैं तथा नर्मदा नदी मोक्ष दायनी हैं। 12 ज्योतिर्लिंग में ओंकारेश्वर का पवित्र ज्योतिर्लिंग भी शामिल हैं। शास्त्रों में मान्यता हैं कि जब तक तीर्थ यात्री ओंकारेश्वर के दर्शन कर यहां नर्मदा सहित अन्य नदी का जल नही चढ़ाते हैं तब तक उनकी यात्रा पूर्ण नही मानी जाती हैं।

Medha Pragati
मेधा बिहार की रहने वाली हैं। वो अपनी लेखनी के दम पर समाज में सकारात्मकता का माहौल बनाना चाहती हैं। उनके द्वारा लिखे गए पोस्ट हमारे अंदर नई ऊर्जा का संचार करती है।
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