स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय द्वारा आचार्य मनोज कुमार शर्मा को संस्कृत विषय में शोध पूर्ण करने पर पीएचडी (विद्यावारिधि) की उपाधि प्रदान की गई। – The Uttarakhand News

स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय द्वारा आचार्य मनोज कुमार शर्मा को संस्कृत विषय में शोध पूर्ण करने पर पीएचडी (विद्यावारिधि) की उपाधि प्रदान की गई।

स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय द्वारा आचार्य मनोज कुमार शर्मा को संस्कृत विषय में शोध पूर्ण करने पर पीएचडी (विद्यावारिधि) की उपाधि प्रदान की गई।

उत्तराखंड (देहरादून) शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026

स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय द्वारा आचार्य मनोज कुमार शर्मा को संस्कृत विषय में शोध पूर्ण करने पर पीएचडी (विद्यावारिधि) की उपाधि प्रदान की गई। उनका शोध विषय “उत्तराखण्ड के आधुनिक प्रमुख संस्कृत कवियों की रचनाओं में काव्य सौन्दर्य तत्त्वों का निरूपण” रहा। उनके इस शोध कार्य को संस्कृत साहित्य एवं काव्यशास्त्र के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।

आचार्य मनोज कुमार शर्मा ने अपने शोध के माध्यम से उत्तराखण्ड के आधुनिक संस्कृत कवियों की रचनाओं में निहित काव्य सौन्दर्य के विविध तत्त्वों का अध्ययन एवं विश्लेषण किया। उनके शोध में उत्तराखण्ड की समृद्ध संस्कृत साहित्यिक परम्परा तथा आधुनिक संस्कृत काव्य की विशिष्टताओं को रेखांकित किया गया है। उनकी इस उपलब्धि से संस्कृत भाषा, साहित्य एवं शोध के क्षेत्र में कार्य करने वाले विद्वानों और संस्कृत प्रेमियों में हर्ष का वातावरण है।

इस शोध कार्य में उनके शोध निर्देशक डॉ. आनंद मोहन जोशी तथा सह-शोध निर्देशक डॉ. प्रकाश चंद्र पंत का विशेष मार्गदर्शन एवं सहयोग रहा। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुंदरियाल, डीन रिसर्च डॉ. एस.के. श्रीवास्तव तथा संस्कृत विभागाध्यक्ष सुभाष बडोला सहित विश्वविद्यालय के अन्य विद्वानों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की।

इसी क्रम में श्री गुरु राम राय लक्ष्मण संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र प्रसाद डंगवाल सहित अनेक शिक्षाविदों, संस्कृत विद्वानों, सहकर्मियों एवं शुभचिंतकों ने आचार्य मनोज कुमार शर्मा को पीएचडी की उपाधि प्राप्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए आशा व्यक्त की कि वे संस्कृत भाषा एवं साहित्य के प्रचार-प्रसार, संरक्षण तथा संवर्धन में निरंतर महत्त्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।

आचार्य मनोज कुमार शर्मा की यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत परिश्रम, लगन और अकादमिक प्रतिबद्धता का परिणाम है, बल्कि उत्तराखण्ड की संस्कृत साहित्यिक परम्परा के लिए भी गौरव का विषय है। उनकी इस सफलता से संस्कृत के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं युवा विद्वानों को भी प्रेरणा मिलेगी।

संस्कृत साहित्य के क्षेत्र में इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर आचार्य मनोज कुमार शर्मा को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ।

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