सामूहिक अवकाश लेकर परेड मैदान से मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे शिक्षक।
उत्तराखंड (देहरादून) शनिवार, 10 अक्टूबर 2026
शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त करने तथा पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) की बहाली की मांग को लेकर उत्तराखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने आंदोलन को निर्णायक चरण में ले जाने का ऐलान किया है। संघ ने घोषणा की है कि दिनांक 24 अक्टूबर 2026 को प्रदेशभर के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक सामूहिक अवकाश लेकर परेड मैदान, देहरादून से मुख्यमंत्री आवास कूच करेंगे। संघ के अनुसार, आंदोलन के समर्थन में प्रदेश के विद्यालयों में तालाबंदी रहेगी।
शिक्षक भवन, रेसकोर्स, देहरादून में आयोजित संघ की आपात बैठक में प्रांतीय तदर्थ समिति सहित विभिन्न जनपदों के पदाधिकारियों ने प्रतिभाग कर शिक्षकों की ज्वलंत समस्याओं पर गंभीर मंथन किया। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि टीईटी की अनिवार्यता एवं पुरानी पेंशन बहाली की मांगों पर ठोस निर्णय होने तक संघर्ष जारी रखा जाएगा।
टीईटी की अनिवार्यता पर शिक्षकों में गहरा आक्रोश
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि निर्धारित सेवा नियमों के अंतर्गत विधिवत नियुक्त होकर वर्षों से राजकीय विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के भविष्य को टीईटी की अनिवार्यता के कारण अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों ने सवाल उठाया कि दशकों से शिक्षा व्यवस्था को अपने अनुभव, परिश्रम और समर्पण से मजबूत करने वाले शिक्षकों के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
वक्ताओं ने कहा कि यदि टीईटी की अनिवार्यता के चलते अनुभवी शिक्षकों की सेवाओं पर संकट उत्पन्न होता है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव केवल शिक्षकों पर ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों और सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों पर भी पड़ेगा। संघ ने सरकार से मांग की कि प्रभावित शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए शीघ्र प्रभावी निर्णय लिया जाए तथा आवश्यक नीतिगत एवं विधिक पहल की जाए।
पुरानी पेंशन बहाली के बिना सामाजिक सुरक्षा अधूरी
बैठक में पुरानी पेंशन योजना की बहाली का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद सम्मानजनक एवं सुरक्षित जीवन प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है। शिक्षकों ने सरकार से मांग की कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के स्थान पर पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
संघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि टीईटी से प्रभावित शिक्षकों के सेवा-सुरक्षा संबंधी प्रश्न और पुरानी पेंशन की मांग केवल कर्मचारी हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की स्थिरता और कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से भी जुड़े हैं।
24 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी एकजुटता का प्रदर्शन
संघ ने आंदोलन की रणनीति के तहत 24 अक्टूबर को परेड मैदान से मुख्यमंत्री आवास तक कूच करने का निर्णय लिया है। सभी जनपदों के पदाधिकारियों को अधिकाधिक शिक्षकों की सहभागिता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संघ ने शिक्षकों से अपने परिवारजनों और आश्रितों सहित शांतिपूर्ण एवं अनुशासित ढंग से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
संघ ने कहा कि यह कार्यक्रम शिक्षकों की एकजुटता, सेवा-सुरक्षा और भविष्य की लड़ाई का महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। सरकार को शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए वार्ता एवं समाधान की दिशा में आगे आना चाहिए।
एनजीओ के हस्तक्षेप और मोबाइल एप की अनिवार्यता पर भी नाराजगी
बैठक में सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था में गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के बढ़ते हस्तक्षेप तथा शिक्षकों पर विभिन्न मोबाइल एप के उपयोग की अनिवार्यता थोपे जाने पर भी चिंता व्यक्त की गई। पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में एप का उपयोग न करने पर वेतन रोकने जैसी चेतावनियां दी जाती हैं। संघ ने कहा कि शिक्षकों पर अतिरिक्त तकनीकी एवं गैर-शैक्षणिक कार्यों का दबाव बढ़ाने के बजाय विद्यालयों में शिक्षण कार्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
संघ ने चेतावनी दी कि शिक्षकों पर अनुचित दबाव बनाने तथा वेतन रोकने की धमकी देने संबंधी मामलों का संगठन स्तर पर विरोध किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर मोबाइल एप संबंधी अव्यावहारिक निर्देशों और एंड्रॉयड फोन के अनिवार्य उपयोग के विरुद्ध भी आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
संघ का स्पष्ट संदेश—मांगों के समाधान तक संघर्ष जारी रहेगा
बैठक में जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह रावत, मनोज तिवारी, दिगंबर सिंह नेगी, जितेंद्र वाल्दिया, वीरेंद्र सिंह कठैत, उत्तम सिंह फर्त्याल, विनोद रतूड़ी, दीपक रावत, अश्वनी कुमार, किशोर जोशी, विक्रम सिंह झिंकवान, जिला मंत्री दिनेश चंद्र भट्ट, जनक सिंह बिष्ट, विजेंद्र सिंह पवार, मुकेश नेगी, जगदीश भंडारी, कमल जोशी, चंद्र प्रकाश चंदोला, रघुवीर सिंह बुटोला, यदुवीर सिंह बिष्ट, सतीश रमोला, रणवीर सिंह नेगी, विनोद बिष्ट, महिपाल सिंह, भूपेश पुरोहित, अजय नेगी एवं रूपक पुरी सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।
संघ ने दोहराया कि शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, पुरानी पेंशन की बहाली और विद्यालयों में सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियों की मांगों को लेकर आंदोलन जारी रहेगा। 24 अक्टूबर का मुख्यमंत्री आवास कूच सरकार तक शिक्षकों की सामूहिक आवाज पहुंचाने और लंबित मांगों के समाधान की दिशा में निर्णायक पहल के रूप में आयोजित किया जाएगा।