उत्तराखंड

पूर्व शिक्षा मंत्री एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के चर्चित उपन्यास ‘कृतघ्न’ के डोगरी अनुवाद ‘किर्तघान’ का आज आयोजित समारोह में लोकार्पण किया गया।

कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा उपस्थित रहे ।

पूर्व शिक्षा मंत्री एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के चर्चित उपन्यास ‘कृतघ्न’ के डोगरी अनुवाद ‘किर्तघान’ का आज आयोजित समारोह में लोकार्पण किया गया।

उत्तराखंड/नई दिल्ली (देहरादून) सोमवार , 09 अगस्त 2026

प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय, नई दिल्ली में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं प्रख्यात साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के चर्चित उपन्यास ‘कृतघ्न’ के डोगरी अनुवाद ‘किर्तघान’ का आज आयोजित समारोह में लोकार्पण किया गया। पुस्तक का डोगरी में अनुवाद जम्मू-कश्मीर की प्रसिद्ध लेखिका शिक्षाविद् एवं अनुवादक डॉ. लवली शर्मा ने किया है।

पुस्तक का लोकार्पण डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, भारत सरकार के कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र, संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा सहित अनेक गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति में हुआ।

डॉ. लवली शर्मा जम्मू-कश्मीर की वरिष्ठ शिक्षाविद्, साहित्यकार एवं अनुवादक हैं। SCERT जम्मू से सेवानिवृत्त डॉ. शर्मा को शिक्षा एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2017 में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। वे कहानी, कविता एवं शैक्षिक लेखन के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं।

डॉ. लवली शर्मा ने कहा कि विश्व प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के उपन्यास ‘कृतघ्न’ का अपनी मातृभाषा डोगरी में अनुवाद करने का अवसर मिलना उनके लिए अत्यंत प्रसन्नता और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि शब्दों से खेलने का शौक हमेशा से रहा, लेकिन किसी उपन्यास का अनुवाद कर उसे पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना उनके लिए एक सपना था।

उन्होंने बताया कि ‘किर्तघान’ आज के समाज में टूटते-बिखरते रिश्तों, संवेदनाओं की कमी और बढ़ती स्वार्थपरता की कहानी है। उपन्यास समाज के अच्छे और बुरे दोनों पहलुओं को सामने रखते हुए टूटते रिश्तों और उनके फिर से जुड़ने की कहानी प्रस्तुत करता है। इसमें मानवीय संवेदनाओं, स्वार्थपरता और रिश्तों की कठिनाइयों के बीच संघर्ष को प्रभावी ढंग से उजागर किया गया है तथा समाज में ह्रास हो रहे नैतिक मूल्यों और संस्कारों को लेकर विचार करने के लिए प्रेरित किया गया है।

इस अवसर पर साहित्य, समाज, प्रशासन, शिक्षा, संस्कृति, मीडिया, उद्योग, विज्ञान, रक्षा, न्याय, अध्यात्म और सामाजिक सेवा से जुड़े अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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