उत्तराखंड

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार के करकमलों द्वारा देश के पहले लेखक गाँव में “प्रकृति की पाठशाला” का शुभारंभ किया गया।

संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री राम माधव तथा उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं लेखक गाँव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार के करकमलों द्वारा देश के पहले लेखक गाँव में “प्रकृति की पाठशाला” का शुभारंभ किया गया।

उत्तराखंड (देहरादून) शनिवार, 18 जुलाई 2026

भारत के पहले लेखक गाँव में “प्रकृति की पाठशाला” का शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस अवसर पर इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री राम माधव तथा उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं लेखक गाँव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं प्रकृति वंदना से हुआ। लेखक गाँव की निदेशक विदुषी ‘निशंक’ ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि “प्रकृति की पाठशाला” का उद्देश्य नई पीढ़ी को प्रकृति के सान्निध्य में भारतीय ज्ञान परंपरा, पर्यावरणीय मूल्यों और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्यावरणविद्, रेमन मैग्सेसे पुरस्कार एवं पद्म भूषण से सम्मानित श्री चंडी प्रसाद भट्ट “प्रकृति की पाठशाला” के प्रथम कुलगुरु होंगे, जिनके मार्गदर्शन में यह अभिनव पहल प्रकृति-आधारित जीवन मूल्यों के प्रसार का राष्ट्रीय केंद्र बनेगी।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री अरुण कुमार ने कहा कि प्रकृति के साथ हमारा रिश्ता उपयोग का नहीं, बल्कि आत्मीयता और सह-अस्तित्व का है। लेखक गाँव में प्रारंभ की गई “प्रकृति की पाठशाला” का यह प्रकल्प पूरे देश के लिए प्रेरणादायक और अनुकरणीय बनेगा।

इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री राम माधव ने कहा कि भारतीय संस्कृति ने प्रकृति को सदैव पूजनीय और जीवन का आधार माना है, जबकि आधुनिक उपभोक्तावादी सोच ने उसे केवल संसाधन समझकर उसका अंधाधुंध दोहन किया। उन्होंने कहा कि आज मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती “नीड वर्सेस ग्रीड” की है। संपूर्ण विश्व प्रकृति संरक्षण की चुनौती का सामना कर रहा है और लेखक गाँव में प्रारंभ की गई “प्रकृति की पाठशाला” इसी वैश्विक आवश्यकता की सार्थक पहल है।

पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को जीवन का प्रथम गुरु माना गया है। “प्रकृति की पाठशाला” बच्चों और युवाओं को प्रकृति के सान्निध्य में सीखने, भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने तथा पर्यावरण संरक्षण को जीवन का संस्कार बनाने का अवसर प्रदान करेगी।

प्रकृति की पाठशाला के आचार्य पद्मश्री कल्याण सिंह रावत ‘मैती’ ने अधिक से अधिक वृक्षारोपण और उनके संरक्षण को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया, जबकि आचार्य एवं प्रख्यात पर्यावरणविद् श्री सच्चिदानंद भारती ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने लेखक गाँव परिसर में वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इस अवसर पर विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी प्रकृति संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन का संकल्प लिया।

इस अवसर पर पद्मश्री डॉ. आर. के. जैन, राज्य मंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि, प्रकृति छायाकार श्री राजू पुसोला, स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप भारद्वाज, सचिव बालकृष्ण चमोली, संयुक्त निदेशक डॉ. प्रदीप कोठियाल, सनराइज एकेडमी की प्रबंध निदेशक पूजा पोखरियाल, साहित्यकार डॉ. बेचैन कंडियाल, डॉ अनिल शर्मा सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, छात्र-छात्राएँ, साहित्यकार, शिक्षाविद्, पर्यावरण प्रेमी तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

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